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हिमाचल के अन्य शहरों की स्थिति

“बद्दी में बढ़ता वायु प्रदूषण: स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संकट”

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से बद्दी का एक्यूआई निरंतर 250 से 351 के बीच चल रहा है। एक अध्ययन रिपोर्ट की मानें, तो यहां हरेक व्यक्ति इस दूषित आबोहवा से रोजाना 18 से 19 सिगरेट के बराबर धुंआ अपने अंदर ले रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो बद्दी की खराब हवा का सबसे बड़ा कारण यहां के उद्योग हैं। इसमें कुछ योगदान गाडिय़ों से होने वाले प्रदूषण का भी है।

पिछले कई दिनों से यहां पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा हो गया है और वाहनों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ चुकी है। इसी तरह लंबे ड्राई स्पेल के कारण उड़ रही धूल और पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में जलाई जा रही पराली भी इसकी एक वजह बताई जा रही है। 

हालांकि एनवायरमेंट इंजीनियर प्रदूषण में पराली का नाम मात्र योगदान मानते हैं, क्योंकि इन दिनों हवाएं उत्तर से पश्चिम की ओर चलती हैं। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में हिमाचल के साथ-साथ देशभर से लोग नौकरी करते हैं, जिन्हें खराब हवा के कारण रोजाना परेशानियां झेलनी पड़ रही है।

खासकर अस्थमा और सांस के रोगियों को ज्यादा कठिनाई हो रही है। प्रदेश में ज्यादातर क्षेत्रों में 45 दिन से बारिश नहीं हुई। इससे चौतरफा धूल के गुबार उड़ रहे हैं। धूल की वजह से भी हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है।

ऐसे में डाक्टरों ने लोगों को मास्क पहनकर घरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। अच्छी बात यह है कि हिमाचल प्रदेश के दूसरे शहरों की हवा साफ या संतोषजनक स्तर पर बनी हुई है।

पांवटा साहिब का एक्यूआई 119, कालाअंब का 145, बरोटीवाला का 150 और नालागढ़ का एक्यूआई 130 दर्ज किया गया है। वहीं शिमला मेंं 57, मनाली में 30 और धर्मशाला में यह 73 रहा। 

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