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महाकुंभ 2025: आस्था, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम

महाकुंभ 2025 को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलकर अद्वितीय और अविस्मरणीय आयोजन बना दिया है। माघ पूर्णिमा स्नान के बाद, अब फाल्गुन मास में भी त्रिवेणी तट पर संस्कृति, पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों के लिए खास आयोजन होंगे।

16 फरवरी से जलवायु सम्मेलन और बर्ड फेस्टिवल शुरू होगा, जिसमें प्रकृति प्रेमियों को विभिन्न पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों को देखने का अवसर मिलेगा। गंगा, यमुना और सरस्वती पंडालों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी।

महाकुंभ 2025 में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

गंगा, यमुना और सरस्वती पंडालों पर देशभर के नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।
बॉलीवुड सिंगर कैलाश खेर, मोहित चौहान, कविता सेठ, नवदीप वडाली, सुचेता भिड़े, नितिन मुकेश जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
शास्त्रीय संगीत से लेकर लोक नृत्य तक, भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, कथक, ओडिसी और ध्रुपद गायन जैसी प्रस्तुतियां होंगी।

गंगा पंडाल पर गुरुवार से कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं, जबकि शुक्रवार से त्रिवेणी, यमुना और सरस्वती पंडालों पर भी सांस्कृतिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

महाकुंभ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूकता लाने का मंच बनेगा।
16 से 18 फरवरी तक अंतरराष्ट्रीय बर्ड फेस्टिवल होगा जिसमें 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों का मेला लगेगा।
श्रद्धालु लुप्तप्राय इंडियन स्कीमर, फ्लेमिंगो और साइबेरियन क्रेन जैसी पक्षी प्रजातियों का दीदार कर सकेंगे।
साइबेरिया, मंगोलिया, अफगानिस्तान समेत एक दर्जन से अधिक देशों के प्रवासी पक्षी इस उत्सव का हिस्सा बनेंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस आयोजन में ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

महाकुंभ 2025 में अंतरराष्ट्रीय बर्ड फेस्टिवल की खास बातें

फोटोग्राफी, पेंटिंग, नारा लेखन, वाद-विवाद और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं होंगी।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे।
यह फेस्टिवल भारतीय संस्कृति, प्रकृति प्रेम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अद्भुत संगम होगा।

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